मनुष्य का निर्माण खुद उसके हाथो मे होता है वह अपने ही विश्वास
के हाथों निर्मित होता है जैसा वो विश्वास करता है वैसा वो बन जाता है अपनी आँखों
पर भी उसी विश्वास का चश्मा लगा लेता है और उसी से वो सारी दुनिया
को देखता है इसलिए तो कहते है सारी दुनिया कैसी मेरी जैसी
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